By Dr. Purnima Sharma, Secretary General WOW India
अभी श्राद्ध पर्व चल रहे हैं, और 3 अक्टूबर से भगवती की उपासना के पर्व नवरात्र आरम्भ हो जाएँगे जब डाण्डिया और गरबा की धूम रहेगी | इसी को ध्यान में रखते हुए 21 सितम्बर को WOW India द्वारा IPEX भवन, पटपड़गंज में डाण्डिया का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे कथक के लखनऊ घराने के गुरु श्री सतीश शुक्ला जी, जो पद्मभूषण पण्डित बिरजू महाराज जी के भाँजे हैं और उनकी परम्परा यानी कालिका–बिन्दादीन घराने की नृत्य परम्परा को आगे बढ़ाने का कार्य सपरिवार कर रहे हैं | श्री सतीश शुक्ला के हम हृदय से आभारी हैं कि उन्होंने अपने व्यस्त समय में से समय निकाल कर न केवल सपरिवार कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई बल्कि अपनी दो शिष्याओं की नृत्य प्रस्तुति भी कराई |कार्यक्रम के आरम्भ में मुख्य अतिथि का सम्मान किया गया तथा मुख्य अतिथि और WOW India की Chairperson डा शारदा जैन ने दर्शकों को सम्बोधित किया | उसके बाद विधिवत कार्यक्रम का आरम्भ हुआ |
कार्यक्रम का आरम्भ भी श्री शुक्ला जी की दो शिष्याओं सुश्री इशिका नेगी और काजल अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत माँ वाणी के वन्दन के साथ हुआ | नृत्यांगनाओं के साथ तबले पर स्वयं उनके गुरु श्री शुक्ला जी ने संगत की – जो किसी भी कलाकार के लिए गर्व का विषय होता है कि गुरु स्वयं संगत करे | साथ ही वॉयलिन पर साथ दिया जनाब अफ़ज़ाल ज़ुहूर अहमद ने – जो ख़ुद वॉयलिन के दिल्ली घराने के उस्ताद ज़ुहूर अहमद ख़ान साहब के सुपुत्र हैं | श्री करण कुमार ने पढ़न्त किया और शुक्ला जी की धर्मपत्नी श्रीमती रीना शुक्ला तथा उनकी सुपुत्री सुश्री रागेश्वरी शुक्ला ने गायन में साथ दिया | श्रीमती रीना शुक्ला जी स्वयं बनारस घराने के ठुमरी सम्राट पण्डित महादेव प्रसाद जी की सुपुत्री हैं | सरस्वती वन्दना ने वास्तव में दर्शकों को एक प्रकार से सम्मोहित सा कर दिया था |
इसके बाद प्रस्तुति थी सदा की भाँति WOW India की Governing Body के सदस्यों उल्लास और उत्साहपूर्ण गरबा/डाण्डिया की, जिसमें भाग लिया डा शारदा जैन, श्रीमती बानू बंसल, श्रीमती लीना जैन, डा रूबी बंसल, डा दीपिका कोहली, डा रश्मि अग्रवाल, डा प्रिया आर्या, डा इंदु त्यागी, श्रीमती सरिता रस्तोगी और सुश्री अर्चना ने | अत्यन्त भव्य नृत्य को Choreograph किया था सुश्री अर्चना ने |
इसके बाद समय था WOW India की कुछ Branches की Performances का… IPEX ब्रांच की ओर से श्रीमती रचना सरीन और साथियों ने, इन्द्रप्रस्थ ब्रांच की ओर से श्रीमती पूजा भारद्वाज और उनकी सखियों ने तथा डॉक्टर्स की ब्रांच की ओर से डा आभा शर्मा और डा मंजु बारिक तथा उनकी सखियों ने बहुत सुन्दर डाण्डिया/गरबा नृत्य प्रस्तुत किए |
कार्यक्रम के अन्त में इस वर्ष की सबसे अधिक प्रभावशाली नृत्य प्रस्तुति थी – महिषासुरमर्दिनी – जिसका Concept और Choreography थी संस्था की Cultural Secretary और कार्यक्रम की Host श्रीमती लीना की, महिषासुर की भूमिका में स्वयं लीना जैन और महिषासुरमर्दिनी माँ भगवती की भूमिका में संस्था की Joint Secretary डा दीपिका कोहली ने अपने रूप और अभिनय से भूमिका को जीवन्त बना दिया |
श्री सतीश शुक्ला जी की शिष्याओं सुश्री इशिता नेगी और सुश्री काजल अग्रवाल तथा श्री करण कुमार को संस्था की ओर से स्मृति चिह्न तथा Participation Certificats देकर सम्मानित किया गया |
इस अवसर पर DGF की ओर से WOW India की Senior Vice President और एक कर्मठ सदस्य श्रीमती बानू बंसल जी को उनके Hard and Dedicated कार्य के लिए Life Time Achievement Award से सम्मानित किया गया… जिसके लिए संस्था को बानू जी पर गर्व है और उन्हें बधाई के साथ ही DGF को संस्था की ओर से हार्दिक धन्यवाद भी |
कार्यक्रम से पूर्ण स्वादिष्ट Lunch भी रखा गया था तथा कुछ Stalls भी लगाए गए थे | कार्यक्रम में संस्था के सदस्य बड़ी तादाद में उपस्थित थे और दो दिनों तक हमारे पास बहुत सारे सदस्यों के फ़ोन आते रहे कार्यक्रम की प्रशंसा के लिए… बानगी के लिए कुछ फ़ोटोग्राफ़्स यहाँ अपलोड कर रहे हैं…
हम बहुत शीघ्र कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी यू ट्यूब पर अपलोड करेंगे…
धरा उतारे आरता, प्रेमी भए वसन्त
मां वाणी ने धर दिया, सर पर सबके हाथ
तभी मुखर है लेखनी, जिसने पकड़ी आज
आमों की डाली पर भंवरे, गुन गुन गीत सुनाते हैं
कोयल की पंचम को सुनकर, कामदेव मुस्काते हैं
चंचल तितली डाल डाल पर, पुष्पों को चुम्बन देती
मस्त धरा भी सरसों की, वासन्ती चादर से ढकती
—–कात्यायनी
जी हां, अभी 14 फरवरी को मां वाणी की अर्चना के साथ ही स्वागत किया ऋतुराज वसन्त का वसन्त पंचमी के रूप में… इस अवसर पर कुछ रचनाकार मित्रों की बड़ी मनोहारी रचनाएँ प्राप्त हुईं जो आज इस संकलन में हम प्रकाशित कर रहे हैं… वरिष्ठ कवयित्री डा रमा सिंह की निम्न पंक्तियों के साथ…
1.
बुद्धि, विद्या, ज्ञान का, सिर पर रखती हाथ ।
कलम सदा उठती तभी, जब माँ देती साथ ।।
पीली चादर ओढ़कर, आए राज वसन्त ।
कामरूप धरती हुई, रतिमय दिशा दिगन्त ।।
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
डा रमा सिंह🙏🙏🙏
2.
लेकिन वसन्त के राग की आलाप तानें आगे बढ़ाएं उससे पहले “वेलेंटाइन डे” के सन्दर्भ में पुलवामा के अमर शहीदों को श्रद्धानत भाव से नमन करते हुए रूबी शोम की विचारों को झकझोरने वाली एक रचना…
वैलेंटाइन डे याद रहा
पुलवामा तुम भूल गए
देश की खातिर जो
शहीद हुए
तुम वो कुर्बानी भूल गए
देश धर्म पर मिटने वाली
तुम वो 44 जवानी भूल गए
तुम को भी क्या ये याद नहीं
14 फरवरी 19 का दिन
पुलवामा पर हमला करते
वो कायर आतंकी थे
सीने पर जो गोली खाई
भारत मां के लाल, सिपाही थे
रक्त रंजित थी काया उनकी
चेहरे से लहू टपकता था
घायल होकर भी उनके
सीने में आग दहकता था
वो कुर्बानी शहीदों की
तुम वो शहादत भूल गए
वैलेंटाइन का लाल गुलाब तो याद रहा
तुम खून से लथपथ वीरों
को भूल गए
वैलेंटाइन डे याद रहा
पुलवामा तुम भूल गए।
रूबी शोम
3.
शिशिर बीता, बसंत ऋतु आई
तन- मन ने
उपवन – चितवन ने
ठिठुरन छोड़ी,
ली अंगड़ाई !
कोहरे का आवरण हटा
झांक रही प्रकृति छटा !
माँ सरस्वती के स्वागत में
कोकिल ने पंचम तान सुनाई !
सुनकर मीठे स्वर अनुरागी
देखो वह आम्रमंजरी जागी !
‘श्रीहरि’ को आमंत्रित करती
मधुमास की पीतवर्ण तरुणाई,
शिशिर बीता, बसंत ऋतु आई !
डा नीलम वर्मा
4.
बासन्ती रंग, ऊषा के छोर
से बिखर रहा कण कण में आज
सूरज की प्रियतमा ओढ़ चुनर
बिखराती किरणें साज साज ।
बज उठे सप्त स्वर दिशा दिशा
पावनी हवा में है संगीत
झंकृत वीणा की सुर लहरी
में कौन गा रहा मधुर गीत?
कोमल आलोक की धारा में
सतरंगी कण कण निखर गए
कुछ शिशिर बिंदु वाष्पित होकर
चंदन बन हवा में बिखर गए।
उस तरफ नाचता है मयूर
इस तरफ थिरकता श्वेत हंस
वेदों के मंत्र वाणी बन कर
गूंजते हैं चहुं दिस अंश अंश।
निर्झरा बह रही स्नेह धार
मां की आभा है सृष्टि व्याप्त
यह पुण्य पंचमी, है बसन्त
पुलकित है दिन पुलकित है रात
वेदों का ज्ञान, वीणा के स्वर
गति, ताल, छंद और अलंकार
भाषा, अभिलाषा की देवी!
हे सरस्वती! तुम्हें नमस्कार!
प्राणेंद्र नाथ मिश्र
5.
लो सखी आ गया बसन्त
खोला जो कपाट खिड़की का
भर गई कमरे में सुगन्ध
मंद मंद बयार चली
पिया ने किया आलिंगन।
लो सखी आ गया बसन्त
खगकुल उड़ चले अपना
चुग्गा खाने को
उधर बासन्ती सुगन्ध बयार ने भी
निवेदन किया अपने पास आने को।
लो देखो उड़ चली तितलियाँ भी
पुष्प वृंदा का रसपान करने को।
लो सखी आ गया फिर से बसन्त।
हर अंकुर ने ली अंगड़ाई स्वागत
करने का बसन्त को।
आमों की डाल पर बैठी कोयलिया
चित्कार उठी ,अब करो न देरी
देखो सखी आ गया बसन्त।
जब रोम-रोम खिल उठे
उर में प्रेम के भाव जगे
देखकर निज साजन को सजनी
कुछ गुनगुना उठे तभी समझो
लो सखी आ गया बसन्त
रेखा अस्थाना
6.
सर्दी की ठिठुरन से
शीत भरी सिहरन से
पाने निजात देखो आया बसंत
खेतों में झूमे सरसों की डाली
कोयलिया बोले बागों में काली
झूम झूम जाए आम की अमराई
चूम चूम जाए बदन हवा की अंगड़ाई
फागुन के आने का संदेशा बसंत
माघ के महीने में आता बसंत
बागों में फूलों का खिलना बसंत
खेतों में नई फसलों का, आना बसंत
सजी है आज धरती, करके श्रंगार
प्रकृति का कैसा देखो, अनुपम उपहार
झूम झूम आया ऋतु राज बसंत
बरसे बदरिया नृत्य करे मोर
मन के किसी कोने में, होने लगा शोर
चहुं ओर उत्सव है आया बसंत
धरा पर है होता, आगमन शारदे का
करें हम पूजन वंदन, मां शारदे का
वरदान हमको, देना ए माता
अंधेरा घना है,मिटा दो ए माता
पीले वस्त्र पीले रंग है पीला सब वातावरण
करती है आज धरा ऋतु राज का वरण
तरुवर से पात झरे, मधुवन में फूल खिले
हरियाली लेके आज फिर आया बसंत
सर्दी से ठिठुरन से
शीत भरी सिहरन से
पाने निजात देखो आया बसंत।
रूबी शोम
7.
खेत खलिहान डगर डगर पे, छाया बसन्त हैं जम के
मौसम हैं ये सुहाना, संग गाओ गीत उमंग के
सरसों इठला रही हैं और अमुवा की डाल पे मैना
धरती हुई बासंती, लगे पहनें सुनहरा गहना
त्योहारों की है रौनक, सजना हैं और संवरना
ऋतुराज दे निमंत्रण, आयेगा फाग महीना
सूरज की सुनहरी किरणें, पड़ती मचल मचल के
खेत खलिहान डगर पे, छाया बसन्त हैं जम के
हुई शीत ऋतु समापन, माघ पंचमी हैं आयी
माँ शारदे का पूजन, हैं बुद्धि विवेक दायी
पुष्पद को मिल रही हैं, नये कोपलों की दौलत
बौरों से लद गए हैं, आम्र व्रक्ष हुए हैं मादक
सब कुछ नया नया सा, देख आत्मा मुस्करायी
हर ओर हैं हरियाली, रंगत धरा पे छाई
वसुधा भी जँच रही हैं, चूनर नई पहन के
कोमल खिली हैं कलियां, उपवन में पुष्प महकें
खेत खलिहान डगर पे, छाया बसन्त हैं जम के
मौसम हैं ये सुहाना, संग गाओ गीत उमंग के
नीरज सक्सेना
8.
अमृत रस लिए आया है बसंत
चहुं और फैलाने स्वर्णिम खुशहाली,
विदा हो गया शीत का कोहरा और पतझड़,
आए हैं ऋतुराज राग रंग लेकर
उर स्पंदन में भरती प्रकृति की छटा निराली।
क्षितिज पर चमक आया है सूरज
लिए किरणें उम्मीदों की
गदराया धरती का यौवन यू जैसे
चले कामिनी इठलाती लिए गगरिया खुशियों की।
अमृत रस लिए आया है बसंत
पेड़ों ने जब डाला हरियाली का पालना
तो झूम उठी धरा ये मतवारी,
मीठे मीठे गीत सुनाती कोयलिया
फुदक रही देखो अंबुआ की डारी डारी,
मीठी मीठी धूप भी उतर आई है अंगना,
तो झूला झुलाने भी आ गई है मदमस्त पवन,
उदास हृदय में छाई अब सृजन की फुहार
आया बसंत लिए प्यार भरी विविध गंध और विपुल रंग।
अमृत रस लिए आया है बसंत
नवजात कोपलें फूट पड़ी है सुखी शाखाओं में
देखो तो जरा चटकीले हरे रंग में मुस्काती
हर टहनी पर झूल रही है बाकी चितवन लिए,
कुछ खिली अधखिली सुकुमारी कलियां लज़्जाती।
अमले तास पलाश जूही चंपा चमेली
सरसों के महकते फूलों की सजी है जो बारात,
और गुलाबी फूलों की महकती रूमानी खुशबू,
आहत हृदय को देती है प्रेम की प्यारी सी सौगातl
छाई है हवाओं में ये उल्लास की गंन्ध
जो चित में बजा रही है उमंग की मृदंग,
हर जीवन दहक रहा अब गुलमोहर सा,
उड़ता जा रहा यह मन उन्मुक्त स्वच्छंद।
अमृत रस लिए आया है बसंत
मन के मधुबन में जो मेरे थी मौन उदासी पतझड़ की,
सांकल खोल हृदय के भर ली खुशबू मैने वो बासन्ती सी,
दहकते फूलों की रंगत लेकर अपने गीतों की लड़ियां पिरोकर,
बनाऊंगी मैं एक सुंदर सी बंधनवार,
सजाऊंगी हृदय का आंगन चौबारा,
लगाऊंगी चौखट पे सुंदर सी बंधनवार,
रखूंगी भाव भरा एक कलश, मैं अपने हृदय के द्वार,
करूंगी मैं यूं ही तेरा इंतजार, ए बसंतl
अमृत रस लिए आया है बसंतl
ओ प्रियतम बसंत, हर वर्ष यूं ही आना,
करते हो जैसे धरा को सुशोभित,
मेरे जीवन को भी ऐसे ही सजाना,
और चाहती हूं मैं बस इतना
आत्मा को मेरी ,अपना वसन बासन्ति दे जाना
अमृत रस लिए आया है बसंत
मधु रुस्तगी
9.
आज बसन्त ने मेरे द्वार पर, दस्तक लगाई
नई कोपलें खिल उठी, हवा ने ली अंगड़ाई
मस्त बयार ने बुझे दिलों में आस जगाई
शीत लहर को विदा देती, हवा फागुनी आई
फूलों की महक ने ताजगी चहुं ओर फैलाई
रंग-बिरंगे फूलों की छटा मेरे मन को भाई
देख जन जन का हर्ष, बासंती हवा मुस्काई
हवा के शीतल झोंकों ने, कैसी ठंडक पहुंचाई
बसंत तो बसंत है, श्रेष्ठ ऋतु कहलाई
जीवन रहे बसंत सा, गुहार हमने लगाई।
सुमन माहेश्वरी
10.
सखी री फिर आया बसंत
नव पल्लव पा
डाली डाली झूम रही
कुहके कोयल
पी आए है
पी आए है
गई शरद की ठंडी पवन अब
मन मेंउठी हिलोर फिर से
देखो देखो नव पल्लव भी
झांक रहे है
ओट डाल की
नहीं कोई अवरोध
झूमे संग फूलों के
होके अब मद मस्त
भँवरे करते है गुंजार
चिड़िया भी अब फुदक रही है
गाती गीत भर उल्लास
आओ सखी अब हम मनाये
बसंत मन भावन का त्योहार
बानू बंसल
11.
और अब अन्त में कुछ हमारी स्वयं की लेखनी से🙂🙏💐
वसन्त का राग मनोहर
मन वीणा पर गाते जाते
आज पवन मस्ती में बहता
कलियों संग अठखेली करता
और हवा की देख मसखरी
हर पीला पत्ता मुस्काता
रूपसि बरखा भी मेघों के
मध्य खड़ी निज केश झटकती
मोती जैसी बूंदों का जल
हर घर आंगन में टपकाती
कुछ तो शीत लहर की ठण्डक
कुछ रिमझिम बूंदों की सिहरन
गोरी के मन नई उमंगे
मचल मचल कर हैं उमगातीं
किन्तु तभी अरूणिम उषा को
आगे करके भोर है आती
और प्रिया को मेघों की वह
रश्मिकरों से दूर भगाती
वातायन के पट खुलते ही
भोर सुहानी भीतर तकती
हिम शिखरों पर कलश धूप का
किरणें निज कर लेकर आतीं
धीरे धीरे धूप बिखरती
तितली पुष्पों पर मंडरातीं
कुसुमों के अधरों पर चुम्बन
जड़कर, मधुरस ले उड़ जातीं
और उधर भंवरे भी देखो
सुमनों से कुछ छन्द चुराते
और हरित पत्रों पर वासन्ती
कुछ गीत तभी रच जाते
गोरैया निज नयनों में है
नीलम जैसे नभ को भरती
और क्षितिज से मिलन हेतु वह
दूर गगन में उड़ती जाती
मलय समीरण भी नदिया के
जल में कुछ हलचल कर देता
और गोरी के नयनों में भी
प्रेम के अनगिन रंग भर देता
आम्र कुँज में कामदेव का
उसी समय नर्तन हो जाता
बौराया वसन्त तब प्रेमी
जन पर है निज बाण चलाता
धीरे धीरे धूप भास्कर
संग गगन के पीछे छिपती
और सिंदूरी संझा निज पग
हौले से निशि के घर धरती
झीलों के दर्पण में चन्दा
जैसा मुखड़ा रजनी तकती
और निशिकर के प्रेम पाश में
बंधकर सुध बुध भूली रहती
पर अनंग के बाणों से बिंध
प्रेमीजन बौराए जाते
और वसन्त का राग मनोहर
मन वीणा पर गाते जाते
—–कात्यायनी
29 अप्रैल 2023 को इन्द्रप्रस्थ विस्तार स्थित IPEX भवन में WOW India की ओर से एक काव्य सन्ध्या का सफल आयोजन किया – जिसमें साहित्य मुग्धा दर्पण नाम की साहित्यिक संस्था भी भागीदार बनी | कार्यक्रम की अध्यक्षता की पुणे से पधारे और DRDO के वैज्ञानिक डॉ हिमाँशु शेखर ने | कार्यक्रम का आरम्भ रूबी शोम ने सरस्वती वन्दना से किया | उसके बाद साहित्य मुग्धा दर्पण की अध्यक्षा श्रीमती रेखा अस्थाना ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने वाली स्वरचित कविता का पाठ भी किया | तत्पश्चात WOW India की Secretary General डॉ पूर्णिमा शर्मा ने कार्यक्रम के विषय में बात करते हुए गंगा सप्तमी और सीता नवमी की प्रासंगिकता और उनमें निहित सन्देशों के विषय में बात की | साथ ही अपनी कविता “आओ शब्दों को चहका दें, अर्थों को सार्थकता दे दें” का पाठ भी किया | और फिर कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ हिमाँशु शेखर की आज्ञा से काव्य सन्ध्या का विधिवत आरम्भ हुआ | हिमाँशु जी ने व्यंग्य रचना “नरकगामी” के साथ ही कुछ आशु कविताओं और कुछ अन्य कविताओं का पाठ किया |
श्री R K Rastogi जी की कविता में संविधान संशोधन और रोज़गार के अवसरों के सन्दर्भ थे तो पूनम गुप्ता ने “माँ” को समर्पित कविता का पाठ किया | नीरज सक्सेना ने भी पहले “माँ” के सम्मान में कुछ पंक्तियाँ पढ़कर “मैं रोती आँखों का अश्रु हूँ” शीर्षक से बड़ी जोश और भावपूर्ण कविता का पाठ किया | पूजा भारद्वाज ने भी अपनी कविता के माध्यम से “माँ” का ही स्मरण किया | पुनीता सिंह की रचना भी प्रभावशाली रही | नूतन शर्मा की कविता “कैसे वो बिताया” में एक सैनिक की पत्नी की कथा व्यथा ध्वनित हुई तो उन्होंने एक माहिया भी गाकर सुनाया | कार्यक्रम का आकर्षण रही मुकेश आनन्द जी की रचना “लक्ष्मण को प्राणदण्ड” | इस कविता को रामायण की एक कथा को आधार बनाकर लिखा गया था | एक प्रसंग आता है कि एक बार यम श्री राम के साथ कुछ मन्त्रणा करने आए | किन्तु उन्होंने श्री राम से एक वचन माँगा कि जितनी देर मन्त्रणा चलेगी उतनी देर कोई व्यवधान नहीं उपस्थित करेगा – और यदि ऐसा होता है तो आप मर्यादा की रक्षा करते हुए उसे प्राणदण्ड देंगे | भगवान राम इस पर सहमत हो गए और उन्होंने अपने सबसे प्रिय अनुज लक्ष्मण को द्वार की रक्षा हेतु नियुक्त कर दिया | इसी बीच परम क्रोधी ऋषि दुर्वासा भी वहाँ आ गए | लक्ष्मण ने उन्हें बहुत रोकना चाहा किन्तु वे नहीं माने तो लक्ष्मण को बरबस भीतर जाकर भाई को उनके आगमन की सूचना देनी पड़ी | राम ने दुर्वासा ऋषि का स्वागत सत्कार तो किया – किन्तु यम को दिए वचन के अनुसार उन्हें लक्ष्मण को मृत्युदण्ड देना था क्योंकि उन्होंने मन्त्रणा में व्यवधान उपस्थित किया था | बड़ी कठिन स्थिति थी | तब उनके गुरुदेव महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें सुझाव दिया कि अपने किसी प्रिय का त्याग भी उसकी मृत्यु के समान ही होता है, अतः तुम अपने वचन का पालन करने के लिए लक्ष्मण का त्याग कर दो | लक्ष्मण ने कहा कि श्री राम से दूर जाना उनके लिए मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी होगा – इसलिए वे उनकी मर्यादा और वचन का पालन करते हुए अपने शरीर का त्याग कर देंगे – और उन्होंने जल समाधि ले ली | मुकेश जी ने इस घटना का वर्णन के साथ ही और भी कुछ प्रसंगों को उठाते हुए एक परिकल्पना प्रस्तुत की कि यदि राम और लक्ष्मण आज जीवित होते तो लक्ष्मण और उनके मध्य किस प्रकार का वार्तालाप होता | रचना वास्तव में अत्यन्त प्रभावशाली थी |
कार्यक्रम का समापन सभी रचनाकारों के सम्मान के बाद WOW India की Senior Vice President श्रीमती बानू बंसल जी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ | कार्यक्रम में WOW India की कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती अर्चना गर्ग सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे | कार्यक्रम का सफल संचालन WOW India की Cultural Secretary लीना जैन ने किया |
कार्यक्रम से पूर्व स्वस्थ जीवन के प्रति जागरूकता के लिए उपस्थित सदस्यों के HB और Thyroid की जाँच भी की गई |
बहुत शीघ्र ही कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग प्रस्तुत की जाएगी, तब तक प्रस्तुत हैं कार्यक्रम के कुछ चित्र…
त्यौहारों और पर्वों का मौसम है, करवाचौथ, अहोई, दीपावली, भाई दूज, छठ पूजा जैसे बड़े बड़े त्यौहार इस महीने में आते हैं | तो तैयारियाँ तो चल रही होंगी जोर शोर से ? ऐसे मैं थकान भी हो रही होगी ? पर क्या आप जानती हैं कि योग की कुछ प्रक्रियाओं के द्वारा हम थकान से छुटकारा पाकर फिर से नई ऊर्जा अपने तन मन में अनुभव कर सकते हैं ? तो स्वागत है आपका मंगलवार 26 अक्तूबर को Zoom पर WOW India द्वारा आयोजित Workshop में दिन में 2 बजे से… जिसमें हमारे योगाचार्य श्री सत्येन्द्र कुमार जी सिखाएँगे कुछ इसी तरह के अभ्यास… जो लोग इसका लाभ उठाना चाहते हैं कृपया अपने नाम 7042321200 / 9811442448 में से किसी भी मोबाइल नंबर पर भेज सकते हैं… कार्यक्रम से जुड़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें…
सादर:
डॉ शारदा जैन, Chairperson WOW India
डॉ एस लक्ष्मी देवी, President WOW Inia
डॉ पूर्णिमा शर्मा, Secretary General WOW India
संस्था की कार्यकारिणी के सभी सदस्य
WOW India is inviting you to a scheduled Zoom meeting.
Topic: Some relaxesion exercises to relieve fatigue
Time: Oct 26, 2021 02:00 PM India
Join Zoom Meeting
https://us02web.zoom.us/j/88099965164?pwd=Z3pSKzVnRWwrbHVuU2V1dnpXZXFyZz09
Meeting ID: 880 9996 5164
Passcode: 764577
कल आठ मार्च को डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म Zoom पर WOW India और DGF के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम के बीच Award Ceremony का आयोजन किया गया | कार्यक्रम का आरम्भ दन्त चिकित्सक डॉ दीप्ति भल्ला के गाए थीम के साथ हुआ | डॉ भल्ला ने प्रसिद्ध गायिका सोना महापात्र के गाए प्रसिद्ध गीत “दीवारें ऊँची हैं गलियाँ हैं कम” को बहुत ही ख़ूबसूरत अन्दाज़ में प्रस्तुत किया, जिसे स्वाति चक्रवर्ती ने लिखा था और आमिर खान के प्रसिद्ध प्रोजेक्ट “सत्यमेव जयते” के लिए राम संपथ ने कम्पोज़ किया था | इस गीत के बजते ही जैसे समा बन्ध गया |
कार्यक्रम के आरम्भ में WOW India की Chairperson डॉ शारदा जैन ने महिलाओं का आह्वाहन किया कि वे नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की जाँच कराती रहें ताकि एक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकें | साथ ही ये भी कि हमें अपने महिला होने पर और अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना चाहिए – और इस वर्ष की थीम का उद्देश्य भी यही है | एक और बड़ी सारगर्भित बात उन्होंने कही कि व्यक्ति जीवन भर विद्यार्थी तो बना ही रहता है, लेकिन हमें शिक्षक बनना आना चाहिए – हम जो भी सीखें उसे हमें दूसरों की सिखाना चाहिए – तभी हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे कि एक समर्थ महिला अपने साथ साथ अन्य महिलाओं को भी समर्थ बनाने की दिशा में प्रयास करे |
इस वर्ष की महिला दिवस की थीम थी Choose to Challenge, जिसके विषय में बोलते हुए संस्था की Secretary
General डॉ पूर्णिमा शर्मा ने कहा कि इस थीम का उद्देश्य यही है कि हम गली सड़ी उन रूढ़ियों को चुनौती दे सकते हैं जो नारी को दबाने के पक्ष में हों, बहुत से पूर्वाग्रहों को चुनौती दे सकती हैं जो हमें आगे बढ़ने से रोकते हों, जो भी नारी के विषय में यदि ग़लत धारणाएँ हैं उन्हें चुनौती के लिए चुन सकती हैं, साथ ही समाज में महिलाओं की स्थिति को सुधारने और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाने की चुनौती को चुन सकती हैं, इसी तरह की बहुत सी चुनौतियों के लिए आगे आया जा सकता है | साथ ही उनका कहना था कि इस थीम का एक ये आशय भी है कि अपने विचारों और अपने कर्तव्यों के लिए हम स्वयं ज़िम्मेदार हैं – हमें ज़िम्मेदारी लेनी ही होगी यदि हम एक जागरूक नागरिक कहलाना चाहते हैं और साथ ही समाज को अपनी सुसंस्कृत सन्तानों के रूप में आदर्श नागरिक देना चाहती हैं तो | एक महिला होने के नाते हमारी ये ज़िम्मेदारी भी बनती है कि हम समाज से असमानता और लिंग भेद के कारण जो महिलाओं पर अत्याचार होते हैं या महिलाओं को कम करके आँका जाता है उसे समाप्त करने की दिशा में क़दम उठाएँ
संस्था की उपाध्यक्ष बानू बंसल और सदस्य सरिता रस्तोगी ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया और साथ ही पूजा श्रीवास्तव जी ने अपनी सुमधुर वाणी में स्वरचित माँ वाणी की वन्दना प्रस्तुत की |
संस्था की अध्यक्ष डॉ एस लक्ष्मी देवी ने संस्था के विषय में बताते हुए संस्था की गतिविधियों और उद्देश्यों पर बात की साथ ही श्रीमद्भगवद्गीता के एक श्लोक का उद्धरण
प्रस्तुत करते हुए संस्था के सदस्यों की प्रशंसा करते हुए उनका उत्साहवर्धन भी किया की कोरोना के आतंक और लॉकडाउन के चलते हुए भी संस्था के सदस्यों ने हार नहीं मानी और टेक्नोलोजी का लाभ उठाते हुए डिज़िटल प्लेटफ़ॉर्म पर अपने कार्यक्रम निरन्तर करते रहे | डॉ लक्ष्मी ने इस अवसर पर एक बहुत ख़ूबसूरत गीत “उदय हुआ नवयुग का सूरज, जगी देश की नारी” अपनी सुरीली आवाज़ में प्रस्तुत किया | साथ ही उन्होंने कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ प्रभजोत कुलकर्णी के विषय में बताते हुए उनका स्वागत भी किया | संस्था की ओर से डॉ कुलकर्णी को एक प्रशस्ति चिह्न भी भेंट किया गया |
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ प्रभजोत कुलकर्णी ने WOW India के द्वारा 2019 में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रस्तुत एक नाटिका “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ हुनर सिखाओ” की चर्चा करते हुए इच्छा व्यक्त की कि हम लोग यदि स्कूल कॉलेजेज़ में भी Awareness program के अन्तर्गत इस तरह की छोटी छोटी झलकियाँ प्रस्तुत कर सकें तो अच्छा रहेगा | साथ ही ये भी कि हम लोग जिस तरह पहले स्कूल कॉलेजेज़ में हेल्थ चेकअप पर भी ध्यान दें |
उनका ये प्रस्ताव वास्तव में संस्था के लिए गौरव की बात है और इस दिशा में संस्था कार्य भी करेगी | डॉ कुलकर्णी ने इस बात पर चिन्ता भी ज़ाहिर की कि महिला दिवस पर तो हम सब महिलाओं की, कन्याओं की तारीफें करते हैं, लेकिन अभी भी समाज में बहुत सी ऐसी कुरीतियाँ विद्यमान हैं जो निकल जानी चाहियें | और ये भी कि इस कार्य के लिए महिलाओं को ही आगे आना होगा – और Choose to Challenge थीम का उद्देश्य भी यही है | यदि एक महिला अपने आपमें सशक्त होगी, Perfect होगी तो उसका परिवार सशक्त होगा, परिवार सशक्त होगा तो समाज सशक्त होगा और समाज सशक्त होने से देश सशक्त होगा |
इस सबके बाद आरम्भ हुआ Award ceremony और रंगारंग कार्यक्रमों का धमाकेदार सिलसिला | इस वर्ष WOW India और DGF ने अपनी Branch Presidents को Woman of the Year Award से सम्मानित किया | Awardees हैं EDGF की President डॉ. ज्योति अग्रवाल, WOW India की सूर्य नगर ब्रांच की President अर्चना गर्ग, WOW India की योजना विहार ब्रांच की President विमलेश अग्रवाल. WOW India की IPEX ब्रांच की President रचना सरीन और WOW India की इन्द्रप्रस्थ ब्रांच की President मोनिका भार्गव |
इस अवसर पर बहुत ख़ूबसूरत नृत्य भी हमारे सदस्यों ने प्रस्तुत किये | जिनमें WOW India की यंग ब्रिगेड से नन्दिनी भार्गव, सान्या गोयल और युवी कपूर ने, WOW India की IPEX ब्रांच से रचना सरीन, अलका श्रीवास्तव और बाला अबरोल ने और सूर्य नगर ब्रांच से अर्चना गर्ग, रेखा अस्थाना, नेहा मनकानी, रूबी शोम, सुनन्दा श्रीवास्तव, उषा रस्तोगी और सुधा मनकानी ने बड़ी उत्साहपूर्ण और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियाँ दीं | इनके अतिरिक्त मोनिका शर्मा और उनकी बेटी नव्या शर्मा ने एक बहुत
ही सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया | IPEX Branch की पूजा टंडन, वन्दना वर्मा और शिल्पी गोयल तथा योजना विहार ब्रांच की विमलेश अग्रवाल की नृत्य प्रस्तुतियाँ हम कल पहले ही यू ट्यूब पर अपलोड कर चुके थे |
अन्त में WOW India की Secretary General डॉ पूर्णिमा शर्मा ने WOW India के Vision & Mission से सदस्यों को अवगत कराया और फिर संस्था की उपाध्यक्ष बानू बंसल जी के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ | कार्यक्रम का संचालन WOW India की Cultural Secretary लीना जैन ने किया | उन्होंने जिस तरह से सारे कार्यक्रम को अपनी ठहरी हुई शैली में एक सिलसिलेवार तरीक़े से कहानी बुनते हुए प्रस्तुत किया वह वास्तव में बहुत सराहनीय रहा और उसके कारण कार्यक्रम में और चार चाँद लग गए | इसके लिए लीना जैन बधाई की पात्र हैं |
आज ही हम सारे कार्यक्रम को अपने यू ट्यूब चैनल पर अपलोड करके उसका लिंक आप सबके साथ साँझा करेंगे ताकि जो लोग कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके वे भी इस कार्यक्रम का आनन्द उठा सकें |
रिपोर्ट: डॉ पूर्णिमा शर्मा, Secretary General WOW India
आज वसन्त पञ्चमी का वासन्ती पर्व है और हम सब माँ वाणी का अभिनन्दन करेंगे | माँ वाणी – सरस्वती – विद्या की – ज्ञान की देवी हैं | ज्ञान का अर्थ है शक्ति प्राप्त करना, सम्मान प्राप्त करना | ज्ञानार्जन करके व्यक्ति न केवल भौतिक जीवन में प्रगति कर सकता है अपितु मोक्ष की ओर भी अग्रसर हो सकता है | पुराणों में कहा गया है “सा विद्या या विमुक्तये” (विष्णु पुराण 1/19/41) अर्थात ज्ञान वही होता है जो व्यक्ति को मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करे | मोक्ष का अर्थ शरीर से मुक्ति नहीं है | मोक्ष का अर्थ है समस्त प्रकार के भयों से मुक्ति, समस्त प्रकार के सन्देहों से मुक्ति, समस्त प्रकार के अज्ञान – कुरीतियों – दुर्भावनाओं से मुक्ति – ताकि व्यक्ति के समक्ष उसका लक्ष्य स्पष्ट हो सके और उस लक्ष्य तक पहुँचने का मार्ग स्पष्ट हो सके | हम सब ज्ञान प्राप्त करके भय तथा सन्देहों से मुक्त होकर अपना लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ सकें इसी कामना के साथ सभी को वसन्त पञ्चमी और सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ…
अभी पिछले दिनों कड़ाके की ठण्ड पड़ रही थी | वसन्त के आगमन के साथ ही सर्दी में भी कुछ कमी सी है | और ऐसे सुहाने मौसम में ऋतुराज वसन्त के स्वागत में प्रकृति के कण कण को उल्लसित करता हुआ वसन्त पञ्चमी का अर्थात मधुऋतु का मधुमय पर्व…
कितना विचित्र संयोग है कि इस दिन एक ओर जहाँ ज्ञान विज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती को श्रद्धा सुमन समर्पित किये जाते हैं वहीं दूसरी ओर प्रेम के देवता कामदेव और उनकी पत्नी रति को भी स्नेह सुमनों के हार से विभूषित किया जाता है |
कालिदास के अभिज्ञान शाकुन्तलम् और ऋतुसंहार तथा बाणभट्ट के कादम्बरी और हर्ष चरित जैसे अमर ग्रन्थों में वसन्त ऋतु का तथा प्रेम के इस मधुर पर्व का इतना सुरुचिपूर्ण वर्णन उपलब्ध होता है कि जहाँ या तो प्रेमीजन जीवन भर साथ रहने का संकल्प लेते दिखाई देते हैं या फिर बिरहीजन अपने प्रिय के शीघ्र मिलन की कामना करते दिखाई देते हैं | संस्कृत ग्रन्थों में तो वसन्तोत्सव को मदनोत्सव ही कहा गया है जबकि वसन्त के श्रृंगार टेसू के पुष्पों से सजे वसन्त की मादकता देखकर तथा होली की मस्ती और फाग के गीतों की धुन पर हर मन मचल उठता था | इस मदनोत्सव में नर नारी एकत्र होकर चुन चुन कर पीले पुष्पों के हार बनाकर एक दूसरे को पहनाते और एक दूसरे पर अबीर कुमकुम की बौछार करते हुए वसन्त की मादकता में डूबकर कामदेव और उनकी पत्नी रति की पूजा करते थे | यह पर्व Valentine’s Day की तरह केवल एक दिन के लिए ही प्रेमी जनों के दिलों की धड़कने बढ़ाकर शान्त नहीं हो जाता था, अपितु वसन्त पञ्चमी से लेकर होली तक सारा समय प्रेम के लिए समर्पित होता था | आज भी बंगाल, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश और उत्तराँचल सहित देश के अनेक अंचलों में पीतवस्त्रों और पीतपुष्पों में सजे नर-नारी बाल-वृद्ध एक साथ मिलकर माँ वाणी के वन्दन के साथ साथ प्रेम के इस देवता की भी उल्लासपूर्वक अर्चना करते हैं |
इस सबके पीछे कारण यही है कि इस समय प्रकृति में बहुत बड़े परिवर्तन होते हैं | सर्दियों की विदाई हो जाती है… प्रकृति स्वयं अपने समस्त बन्धन खोलकर – अपनी समस्त सीमाएँ तोड़कर – प्रेम के मद में ऐसी मस्त हो जाती है कि मानो ऋतुराज को रिझाने के लिए ही वासन्ती परिधान धारण कर नव प्रस्फुटित कलिकाओं से स्वयं को सुसज्जित कर लेती है… जिनका अनछुआ नवयौवन लख चारों ओर मंडराते भँवरे गुन गुन करते वसन्त का राग आलापने लगते हैं… और प्रकृति की इस रंग बिरंगी छटा को देखकर मगन हुई कोयल भी कुहू कुहू का गान सुनाती हर जड़ चेतन को प्रेम का नृत्य रचाने को विवश कर देती है… इसीलिए तो वसन्त को ऋतुओं का राजा कहा जाता है…
और संयोग देखिए कि आज ही के दिन नूतन काव्य वधू का अपने गीतों के माध्यम से नूतन श्रृंगार रचने वाले प्रकृति नटी के चतुर चितेरे महाप्राण निराला का जन्मदिवस भी धूम धाम से मनाया जाता है… यों निराला जी का जन्म 21 फरवरी 1899 यानी माघ शुक्ल एकादशी को हुआ था… लेकिन प्रकृति के सरस गायक होने के कारण 1930 से वसन्त पञ्चमी को उनका जन्मदिवस मनाने की प्रथा आरम्भ हुई…
तो, वसन्त के मनमोहक संगीत के साथ सभी मित्रों को सरस्वती पूजन, निराला जयन्ती तथा प्रेम के मधुमय वासन्ती पर्व वसन्त पञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाएँ… इस आशा और विश्वास के साथ कि हम सब ज्ञान प्राप्त करके समस्त भयों तथा सन्देहों से मोक्ष प्राप्त कर अपना लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ सकें… ताकि अपने लक्ष्य को प्राप्त करके उन्मुक्त भाव से प्रेम का राग आलाप सकें…
संग फूलों की बरात लिए लो ऋतु वसन्त अब चहक उठी ||
कोयल की तान सुरीली सी, भँवरे की गुँजन रसभीनी
सुनकर वासन्ती वसन धरे, दुलहिन सी धरती लचक उठी |
धरती का लख कर नवयौवन, लो झूम उठा हर चरन चरन
हर कूल कगार कछारों पर है मधुर रागिनी झनक उठी ||
ऋतु ने नूतन श्रृंगार किया, प्राणों में भर अनुराग दिया
सुख की पीली सरसों फूली, फिर नई उमंगें थिरक उठीं |
पर्वत टीले वन और उपवन हैं झूम रहे मलयानिल से
लो झूम झूम कर मलय पवन घर द्वार द्वार पर महक उठी ||
आठ मार्च को अईपैक्स भवन पटपरगंज में WOW India और DGF के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम के बीच Award Ceremony का आयोजन किया गया | कार्यक्रम का विषय था महिलाओं की सुरक्षा और इसी विषय पर एक छोटे से संवाद के साथ WOW India के सदस्यों ने कार्यक्रम का आरम्भ किया |
WOW India की सेक्रेटरी जनरल डॉ पूर्णिमा शर्मा के कॉन्सेप्ट स्क्रिप्ट को WOW India की कल्चरल सेक्रेटरी लीना जैन के निर्देशन में प्रेसीडेंट डॉ एस लक्ष्मी देवी के साथ मिलकर बानू बंसल, डॉ रूबी बंसल, डॉ प्रिया कपूर, डॉ दीपिका कोहली, डॉ रश्मि जैन, डॉ इंदु त्यागी, सरिता रस्तोगी और सुषमा अग्रवाल ने बड़े अच्छे से पूर्ण ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया | उसके बाद WOW India की Chairperson डॉ शारदा जैन ने महिला सशक्तीकरण के विषय में अपने विचार व्यक्त किये और WOW India की President डॉ एस लक्ष्मी देवी ने WOW India की आरम्भ से लेकर अभी तक की यात्रा के विषय में दर्शकों को अवगत कराया | कार्यक्रम का सफल संचालन लीना जैन ने किया |
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण था परम पूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा जी को सुनना | दीदी माँ ने वैदिक काल से लेकर रामायण महाभारत काल से होते हुए आधुनिक काल तक की नारियों की यात्रा के सारगर्भित वर्णन के साथ ही महिलाओं को सुझाव भी दिया कि हमें अपने घर में बच्चों को संस्कारित करने की आवश्यकता है ताकि महिलाओं के साथ दिन प्रतिदिन होते रहने वाले अपराधों में कभी तो कमी आए | दीदी माँ का कहना था कि सदा लड़कियों को ही क्यों टोका जाता है उनके वस्त्रों के लिए, उनके कार्य के लिए ? इसके बजाए आवश्यकता है हमें अपने परिवारों में बचपन से ही संस्कारों की डालने की ताकि ऐसी कोई समस्या ही उत्पन्न न हो, और एक माँ इस कार्य को जितनी दृढ़ता तथा भावुकता के साथ कर सकती है उतनी दृढ़ता और भावुकता के साथ कोई अन्य इस कार्य को नहीं कर सकता |
कार्यक्रम में जयपुर घराने की विश्व प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना सुश्री प्रेरणा श्रीमाली को शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए Women’s Day Legendary Award से सम्मानित किया गया | संगीत जैसी कलाओं के क्षेत्र में आज के युग में भी संगीत प्रशिक्षण के महत्त्वपूर्ण अंग “गुरु-शिष्य परम्परा” को जीवित बनाए रखने वाले कुछ प्रसिद्ध गुरुओं में प्रेरणा जी की गणना की जाती है | इस अवसर पर बोलते हुए प्रेरणा जी का भी यही प्रश्न था कि विश्व की आधी आबादी यानी महिलाओं को पुरुषों से कम करके क्यों आँका जाता है ? अभी भी क्यों बहुत से स्थानों पर लड़कियों के शाम के बाद घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी जाती है ? और यदि उन्हें जाना भी हो भाई साथ में जाएगा – भले ही वह भाई उनसे दस बरस छोटा ही क्यों न हो ? वास्तव में ये ऐसे ज्वलन्त प्रश्न हैं कि इनके उत्तर तो हम सबको मिलकर खोजने ही होंगे |
इसके अतिरिक्त महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए अत्यन्त योग्य डॉ दीप्ति नाभ को Excellence Award से सम्मानित किया गया | डॉ नाभ Senior Consultant Obstetrician & Gynaecologist & Infertility Expert हैं |
सुश्री योगिता भयाना को समाज सेवा के क्षेत्र में उनके द्वारा किया जा रहे महिलाओं से सम्बन्धित कार्यों के लिए – विशेष रूप से बलात्कार से पीड़ित महिलाओं के लिए जो कार्य वे कर रही हैं उसके लिए – Excellence Award से सम्मानित किया गया | सुश्री भयाना ने हाल ही में UN में अपील की है कि निर्भया काण्ड के चारों दरिन्दों को जिस दिन फाँसी पर लटकाया जाएगा उस दिन को अन्तर्राष्ट्रीय महिला सुरक्षा दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की जाए |
संगीत और कला के क्षेत्र में Excellence Award दिया गया प्रसिद्ध उड़ीसी नृत्यांगना आम्रपाली गुप्ता जी को जिन्हें नृत्य की विधा परम्परागत रूप में विरासत में अपनी पूज्या माता जी से प्राप्त हुई |
इनके अतिरिक्त कुछ Appreciation Awards भी दिए गए | जिनमें: डॉ मीनाक्षी शर्मा को स्वास्थ्य के क्षेत्र में, योजना विहार शाखा की श्रीमती बिमलेश अग्रवाल, इन्द्रप्रस्थ शाखा की श्रीमती सुनीता अरोड़ा और अईपैक्स ब्रांच की श्रीमती वन्दना वर्मा को समाज सेवा के क्षेत्र में, सूर्य नगर ब्रांच की श्रीमती रेखा अस्थाना को शिक्षा के क्षेत्र में तथा इन्द्रप्रस्थ ब्रांच की ही श्रीमती राजेश्वरी भार्गव को संगीत और नृत्य के क्षेत्र में Appreciation Awards से सम्मानित किया गया | सूर्य नगर ब्रांच की श्रीमती सविता कृपलानी और इन्द्रप्रस्थ ब्रांच की Study Seven seas नाम से विदेशों में मेडिकल के पढ़ाई के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए Consultancy Services देने वाली श्रीमती पारुल शर्मा को Best Coordinator के रूप में सम्मानित किया गया | सूर्यनगर तथा इन्द्रप्रस्थ शाखाओं को विभिन्न क्षेत्रों में बेस्ट ब्रांच का अवार्ड दिया गया |
सभी ब्रान्चेज़ की सदस्यों ने तथा Delhi Gynaecologist Forum की मेम्बर्स ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये जिन्हें देखकर खचाखच भरे हॉल में दर्शकगण भी झूमे बिना न रह सके | सबसे आकर्षक कार्यक्रम रहा आम्रपाली गुप्ता जी की दो शिष्याओं अनुप्रिया शर्मा और साँवरी सिंह के शास्त्रीय नृत्य जिनमें आम्रपाली जी के ही नृत्य की झलक देखने को मिली |
खाना और चाट तो स्वाद थी ही जिसका सभी ने लुत्फ़ उठाया | कुल मिलाकर कार्यक्रम बेहद उल्लासमय, उत्साहमय और सफल रहा |
On 7th December 2019, Saturday, a successful series of Discussions on Lifestyle Related Diseases were started by WOW India. Venue was the multipurpose hall, Karishma Apartments, I.P. Extension.Read More